December 7, 2022, 8:13 pm
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बड़ी खबर: देश में जारी रहेगा आरक्षण सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़िए पूरी खबर

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देश में जारी रहेगा आरक्षण सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़िए पूरे जस्टिसों की राय

जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि EWS कोटा सही है। इसके साथ ही EWS कोटा को सुप्रीम कोर्ट की लगी मुहर। मैं जस्टिस माहेश्वरी और जस्टिस त्रिवेदी के फैसले के साथ हूं। मैं EWS संशोधन का सही ठहराता हूं।

जस्टिस बेला त्रिवेदी ने अपने फैसले में कहा कि संविधान का 103वां संशोधन सही है। एससी, एसटी और ओबीसी को तो पहले से ही आरक्षण मिला हुआ है। इसलिए EWS आरक्षण को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है। इसलिए सरकार ने 10 फीसदी अलग सेआरक्षण दिया। EWS कोटा के खिलाफ जो याचिकाएं थी, वो विफल रहीं।

जस्टिस माहेश्वरी की फैसला- हमने समानता का ख्याल रखा है। क्या आर्थिक कोटा आर्थिक आरक्षण देने का का एकमात्र आधार हो सकता है। आर्थिक आधार पर कोटा संविधान की मूल भावना के खिलाफ नहीं है।

फैसला सुनाने के लिए 5 जजों की बेंच बैठी
चीफ जस्टिस ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस रवींद्र भट्ट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच फैसला सुनाने के लिए बैठे। जजों ने फैसला पढ़ना शुरू किया। चीफ जस्टिस ललित ने कहा कि चार फैसले पढ़ने जा रहे हैं।

यूयू ललित एवं रविंद्र भट्ट EWS आरक्षण के खिलाफ

क्या है पूरा मामला, समझिए
सुप्रीम कोर्ट आज 103वें संविधान संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा। इसमें प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के व्यक्तियों को 10 फीसदी आरक्षण प्रदान किया गया है। पीठ ने 27 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। पांच सदस्यीय संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, एस रवींद्र भट, बेला एम त्रिवेदी और जेबी पारदीवाला हैं। मामले में मैराथन सुनवाई लगभग सात दिनों तक चली। इसमें याचिकाकर्ताओं और (तत्कालीन) अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडब्ल्यूएस कोटे का बचाव किया।

याचिका में क्‍या द‍िए गए हैं तर्क?
इससे पहले गोपाल ने तर्क दिया था कि 103वां संविधान संशोधन के साथ धोखा है। जमीनी हकीकत यह है कि यह देश को जाति के आधार पर बांट रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संशोधन सामाजिक न्याय की संवैधानिक दृष्टि पर हमला है। उनके राज्य में, जो केरल है, उन्हें यह कहते हुए खुशी नहीं है कि सरकार ने ईडब्ल्यूएस के लिए एक आदेश जारी किया और शीर्षक जाति था और वह सभी देश की सबसे विशेषाधिकार प्राप्त जातियां थी।

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी , जस्टिस बेला, जस्टिस पारदीवाला भी EWS आरक्षण के पक्ष में

जस्टिस बेला के अनुसार आरक्षण समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं, जस्टिस पारदीवाला भी EWS आरक्षण के पक्ष में

अब तक 5 मे से 3 जज दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस बेला, जस्टिस पारदीवाला भी आरक्षण के पक्ष में,

यूयू ललित एवं रविंद्र भट्ट EWS आरक्षण के खिलाफ

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर लगाई मुहर देश मे जारी रहेगा आरक्षण

EWS आरक्षण मामले में सभी जज के अलग अलग राय

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