December 7, 2022, 7:33 pm
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CG ब्रेकिंग: 58% आरक्षण हुआ रद्द, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़िए पूरी खबर

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रायपुर-प्रदेश में आरक्षण को लेकर कई बार हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, इस बार आरक्षण का मुद्दा कॉलेजों के एडमिशन से जुड़ा हुआ है। भाजपा की सरकार ने सन 2012 में सरकारी नियुक्तियों और अन्य कॉलेज एडमिशन पर 58% आरक्षण की बात कही थी। जिस पर याचिका दायर की गई थी और आज फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस पीपी साहू की डिविजन बैंच ने 58 % आरक्षण को रद्द कर दिया है ।

2012 में भाजपा की सरकार ने लिया था यह फैसला

2012 में तत्कालीन सरकार ने 58 % आरक्षण देने का फैसला किया था । इससे क्षुब्ध होकर डॉ . पंकज साहू एवं अन्य , अरुण कुमार पाठक एवं अन्य ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी , विनय पांडेय एवं अन्य के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी ।

याचिकाकर्ताओं ने निवेदन किया था कि 50 % से ज्यादा आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के विरुद्ध और असंवैधानिक है । इन सभी मामलों की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस पीपी साहू की डिविजन बैंच ने फैसला सुरक्षित कर लिया था ।

इस पर आज फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया है कि 50 % से ज्यादा आरक्षण का प्रावधान असंवैधानिक है । इसे रद्द करते हुए डिविजन बैंच ने याचिकाओं को स्वीकृत कर लिया है ।

दरअसल, साल 2012 में डॉ. रमन सिंह की सरकार ने 58% आरक्षण देने का फैसला किया था। डॉ. पंकज साहू, गुरु घासीदास साहित्य समिति सहित अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग 21 एक याचिका लगाई थी। याचिका में कहा गया था कि 50% से ज्यादा आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के खिलाफ और असंवैधानिक है। सभी मामलों की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी और जस्टिस पीपी साहू की डिवीजन बैंच ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। सोमवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 50% से ज्यादा आरक्षण का प्रावधान असंवैधानिक है। गुरु घासीदास साहित्य समिति ने अनुसूचित जाति का प्रतिशत घटाने का भी विरोध किया था।

आरक्षण को चुनौती देने 21 याचिकाएं लगाई गई थी
राज्य शासन ने वर्ष 2012 में आरक्षण नियमों में संशोधन करते हुए अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण प्रतिशत 4% घटाते हुए 16 से 12% कर दिया था। वहीं, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 20 से बढ़ाते हुए 32% कर दिया। इसके साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को 14% यथावत रखा गया। अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण प्रतिशत में 12 फीसदी की बढ़ोतरी और अनुसूचित जाति वर्ग के आरक्षण में 4% की कटौती को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके साथ ही कोर्ट में अलग-अलग 21 याचिकाएं दायर कर शासन के आरक्षण नियमों को अवैधानिक बताया गया था।

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