December 7, 2022, 8:14 pm
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CG: 58% आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देश के तीन बड़े वकील रखेंगे राज्य का पक्ष

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रायपुर– छत्तीसगढ़ राज्य में 58 % आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देश के तीन बड़े वकील राज्य का पक्ष रखेंगे । सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ के स्थायी वकील ने इस मामले में विशेषज्ञ पैनल के गठन के लिए कपिल सिब्बल , मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनुसिंघवी के नाम सुझाए थे , जिस पर राज्य के एडवोकेट जनरल ने सहमति व्यक्त की है । राज्य शासन द्वारा विशेष पैनल के गठन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ।

बता दें कि हाईकोर्ट ने 50 % से ज्यादा आरक्षण को असंवैधानिक बताया था । रमन सरकार ने 58 % आरक्षण देने का जो फैसला किया था , उसे निरस्त कर दिया । इस पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट में मामले को चुनौती देंगे । साथ ही , यह आरोप भी लगाया था कि तत्कालीन सरकार ने हाईकोर्ट में बेहतर ढंग से अपना पक्ष नहीं रखा । कोर्ट में जो दस्तावेज देने थे , वह भी उपलब्ध नहीं कराए । सीएम ने यह भी कहा था कि कांग्रेस सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देगी ।

रायपुर में आदिवासी छात्र संगठन ने खोला मोर्चा आज सीएम हाउस घेराव के लिए निकले

राजधानी रायपुर में हाई कोर्ट के फैसले के बाद से आदिवासी छात्र संगठन ने मोर्चा खोल कर रखा है और आज सीएम हाउस घेराव के लिए निकल चुके हैं। छात्र नेता सैकड़ों छात्र छात्राओं को लेकर इससे पहले स्कूल शिक्षा मंत्री के बंगले के घेराव भी कर चुके हैं।

सर्व आदिवासी समाज करेगा बड़ा आंदोलन

आरक्षण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरक्षण का मामला गरमाता जा रहा है, दो दिनों से लगातार राजधानी में आदिवासी समाज की बैठकें हो रही हैं,  विधायक और सांसदों को मिलाकर 32 आदिवासी नेता 1 अक्टूबर को राजधानी आएंगे। इसमें उन पर दबाव बनाया जाएगा कि वे एसटी के लिए 32% आरक्षण के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से तत्काल नोटिफिकेशन जारी करने को कहें।

बता दे कि शनिवार को बंजारी नवा रायपुर में सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति शासकीय सेवक संघ के पदाधिकारी जुटे, हाईकोर्ट में सरकार की ओर से रखे पक्ष को समाज ने कमजोर आंका है, समाज इस पर किसी तरह के समझौते को लेकर तैयार नहीं, समाज के पदाधिकारियों ने सीएम भूपेश से भी मुलाकात की।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि आदिवासियों का हक हर हाल में उन्हें मिलेगा, इससे पूर्व सर्व आदिवासी समाज की प्रदेश में बैठक हुई। जिसमें तय किया गया कि मामले को लेकर समाज के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलेंगे। वे 32% आरक्षण जारी रखने की मांग करेंगे। आदिवासी सांसदों और विधायकों से भी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण बरकरार रखने ज्ञापन सौंपेंगे। बैठक में समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की जाएगी। इसके लिए किसी कानूनी जानकार को नियुक्त किया जाएगा। हाईकोर्ट के फैसले की प्रति का अध्ययन करने के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।

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