December 7, 2022, 6:31 pm
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CG: राजधानी रायपुर में होगा महाआंदोलन, आदिवासी समाज उतरेगा सड़कों पर

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रायपुर-प्रदेश के राजधानी रायपुर में लाखों की संख्या में जुटेगा आदिवासी समाज। आदिवासियों के आरक्षण को घटाए जाने के विरोध में होगा महाआंदोलन। बता दें कि आदिवासी समाज मे बैठकों का दौर जारी है कई दिग्गज नेता होंगे शामिल। जानकारी के मुताबिक प्रदेशव्यापी आंदोलन 15 नवम्बर को आयोजित की जा सकती है।

क्या है मामला ?

बता दें कि हाईकोर्ट ने 50 % से ज्यादा आरक्षण को असंवैधानिक बताया था । रमन सरकार ने 58 % आरक्षण देने का जो फैसला किया था , उसे निरस्त कर दिया । इस पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट में मामले को चुनौती देंगे । साथ ही , यह आरोप भी लगाया था कि तत्कालीन सरकार ने हाईकोर्ट में बेहतर ढंग से अपना पक्ष नहीं रखा । कोर्ट में जो दस्तावेज देने थे , वह भी उपलब्ध नहीं कराए । सीएम ने यह भी कहा था कि कांग्रेस सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देगी ।

सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका

छत्तीसगढ़ राज्य में 58 % आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देश के तीन बड़े वकील राज्य का पक्ष रखेंगे । सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ के स्थायी वकील ने इस मामले में विशेषज्ञ पैनल के गठन के लिए कपिल सिब्बल , मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनुसिंघवी के नाम सुझाए थे , जिस पर राज्य के एडवोकेट जनरल ने सहमति व्यक्त की है । राज्य शासन द्वारा विशेष पैनल के गठन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ।

बता दें कि हाईकोर्ट ने 50 % से ज्यादा आरक्षण को असंवैधानिक बताया था । रमन सरकार ने 58 % आरक्षण देने का जो फैसला किया था , उसे निरस्त कर दिया । इस पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि वे सुप्रीम कोर्ट में मामले को चुनौती देंगे । साथ ही , यह आरोप भी लगाया था कि तत्कालीन सरकार ने हाईकोर्ट में बेहतर ढंग से अपना पक्ष नहीं रखा । कोर्ट में जो दस्तावेज देने थे , वह भी उपलब्ध नहीं कराए । सीएम ने यह भी कहा था कि कांग्रेस सरकार किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देगी ।

आरक्षण को चुनौती देने 21 याचिकाएं लगाई गई थी
राज्य शासन ने वर्ष 2012 में आरक्षण नियमों में संशोधन करते हुए अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण प्रतिशत 4% घटाते हुए 16 से 12% कर दिया था। वहीं, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 20 से बढ़ाते हुए 32% कर दिया। इसके साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को 14% यथावत रखा गया। अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण प्रतिशत में 12 फीसदी की बढ़ोतरी और अनुसूचित जाति वर्ग के आरक्षण में 4% की कटौती को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके साथ ही कोर्ट में अलग-अलग 21 याचिकाएं दायर कर शासन के आरक्षण नियमों को अवैधानिक बताया गया था।

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