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Gupt Navratri Puja Vidhi: माँ दुर्गा की पूजा गुप्त नवरात्रि पूजा विधि के बारे में जानिए

Gupt Navratri: जिस प्रकार चैत्र और शारदीय नवरात्रि होती हैं, उसी प्रकार ज्येष्ठ और माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। तो आईये जानते हैं Gupt Navratri Puja Vidhi के बारे में विस्तृति ज्ञानकोष।

Gupt Navratri Puja Vidhi: माँ दुर्गा की पूजा गुप्त नवरात्रि पूजा विधि के बारे में जानिए

गुप्त नवरात्री क्या है

जिस प्रकार चैत्र और शारदीय नवरात्र होते हैं उसी तरह ज्येष्ठा और माघ महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में पड़ने वाली नवरात्री को गुप्त नवरात्री कहा जाता है। गुप्त नवरात्री में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। अगर कोई इन दस महाविद्याओं की शक्ति के रूप में उपासना करे तो उसका जीवन धन – धान्य और सुख से भर जाता है। देवी भगवत में गुप्त नवरात्र की पूजा का विधान लिखा गया है। इस तरह वर्ष में कुल चार नवरात्र होते हैं। यह चारो नवरात्र ऋतू परिवर्तन के समय मनाये जाते हैं। इन विशेष अवसर पर साधक अपनी मनोकामनाओ की पूर्ति के लिए देवी की साधना करते हैं। गुप्त नवरात्र को सफलता पूर्वक संपन्न करने से कई बाधाये समाप्त हो जाती हैं।

Gupt Navratri Kab Hai

गुप्त नवरात्रि कब है? उत्तर: माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 फरवरी 2024 को सुबह 04 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 11 फरवरी 2024 को प्रात: 12 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी

माँ दुर्गा की पूजा गुप्त नवरात्रि पूजा विधि के बारे में जानिए

माघ महीने की गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी से शुरू हो रही है। इस नवरात्रि में भी चैत्र और शरद नवरात्रि की तरह ही, मां दुर्गा की विधि-विधान अनुसार उपासना की जाती है। साथ ही इस दौरान दस महाविद्यियाओं की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के इन दिनों में जो कोई भी सच्ची श्रद्धा से देवी दुर्गा की अराधना करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

Gupt Navratri Puja Vidhi

गुप्त नवरात्री कलश स्थापना विधि और सामग्री :

  • कलश
  • कलश पर बांधने के लिए मौली
  • आम के पत्ते का पल्लव (जिसमें 5 पत्तियां हो या फिर 7)
  • कलश में डालने के लिए रोली, गंगाजल, सिक्का, गेहूं या अक्षत
  • कलश के अलावा इन दिनों जौ भी बोने चाहिए। जिसके लिए मिट्टी का एक बड़ा बर्तन
  • मिट्टी
  • जौ
  • कलावा

मां का श्रृंगार करना है बेहद जरुरी :

नवरात्रि में माता रानी का श्रृंगार जरूर करना चाहिए। श्रृंगार के लिए एक लाल रंग की चुनरी, सिंदूर, इत्र, बिंदी, लाल चूड़ियां, मेहंदी, काजल, लिपस्टिक, कंघा, नेल पेंट और बाकी श्रृंगार की सामग्री से माता रानी का श्रृंगार करना चाहिए।

गुप्त नवरात्री की दस देवियों का नाम है :

  • माता कालिके
  • तारा देवी
  • त्रिपुर सुंदरी
  • माता भुवनेश्वरी
  • माता छिन्नमस्ता
  • माता त्रिपुरभैरवी
  • माँ धूमावती
  • माता बगलामुखी
  • माता मातंगी
  • माता कमला देवी

गुप्त नवरात्री का महत्व :

गुप्त नवरात्री उन लोगों के लिए विशेष होती है जो तंत्र साधना और वशीकरण में विश्वास रखते हैं। इस नवरात्री में तंत्र साधना की जाती है जो गुप्त होती हैं इसलिए इसे गुप्त नवरात्री कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि आमतौर पर तांत्रिक और साधको के लिए होती है। अघोर तांत्रिक गुप्त नवरात्रि में महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इसलिए यह दूसरे नवरात्रि से बिल्कुल अलग होती है। गुप्त नवरात्री की पूजा और कामना जितनी गोपनिय रखी जाती है यह उतनी ही सफल होती है। गृहस्थ मनुष्य गुप्त नवरात्रि नहीं मनाते हैं।

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