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SUCCESS STORY: सड़को पर घूम घूमकर बेचते थे रसगुल्ले और भुजिया, ऐसे मिला सफलता का स्वाद, जानिए बीकानेरवाला फूड्स के सक्सेस की पूरी कहानी

‘बीकानेरवाला’ भारतीय नमकीन और मिठाइयों की श्रेणी में अग्रणी ब्रांड है. इस क्षेत्र में उनकी एक्सपर्टीज लगभग सौ साल से है. उनकी प्रतिष्ठा उनके ब्रांड के वफादार ग्राहकों और समय के साथ बदलाव लाने के उनके अपने कौशल और समर्पण के कारण है. आपको बता दें कि बीकानेरवाला की शुरुआत बीकानेर, राजस्थान के एक छोटे से स्टोर से हुई थी. 

आजादी से पहले हुई थी शुरुआत
बीकानेरवाला, जो आज भारतीय मिठाइयों और स्नैक्स का पर्याय है, 1905 में शुरू हुआ था. एक छोटे से स्टोर के रूप में लाल चंद अग्रवाल ने बीकानेर के पुराने शहरी क्षेत्र में एक छोटी सी मिठाई की दुकान – बीकानेर नमकीन भंडार की शुरुआत की. 

बीकानेरवाला वेबसाइट के अनुसार, इस दुकान ने शुरू में बीकानेरियों के स्वाद के लिए कुछ मिठाइयां और नमकीन बेचीं. बीकानेर में लोगों को यहां का स्वाद भा गया और दुकान समृद्ध हुई. बीकानेर के पुराने शहर क्षेत्र और आसपास की जगहों में अपना नाम बनाने के बाद, परिवार के दो भाई बीकानेर नमकीन भंडार की कहानी में एक और अध्याय लिखने के लिए निकल पड़े. 

सड़कों से शुरू की नई कहानी 
साल 1950 में लालजी परिवार के दो सदस्य अपने पारंपरिक व्यवसाय के विस्तार के नए रास्ते तलाशने के लिए दिल्ली चले गए. जुगलकिशोरजी और केदारनाथजी ने शुरुआत में, बिना किसी अपनी जगह के अपने स्नैक्स जैसे भुजिया और रसगुल्ले सड़कों पर बेचते थे. लेकिन जल्द ही उनकी कमाई और मांग दोनों में बढ़ोतरी हुई.

जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ा, उन्होंने पुरानी दिल्ली की ‘परांठेवाली गली’ में एक दुकान खोली और इसे ‘बीकानेर भुजिया भंडार’ नाम दिया. उन्होंने अब बीकानेर से सामान लाना बंद कर दिया और सब कुछ अपनी दुकान के बैकयार्ड में ही बनाने लगे. उनकी बीकानेरी भुजिया, काजू कतली, और मूंग दाल हलवा फेमस हो गया. लोग इन दोनों भाइयों को बीकानेरवाला के नाम से जानने लगे और शुरुआत हुई बीकानेरवाला की.

पारंपरिक डिशेज के साथ नए उत्पाद भी किए शामिल
1960 के दशक में, उन्होंने पारंपरिक मिठाइयों और नमकीन की अधिक किस्मों को शामिल करके अपने उत्पादों में बढ़ोतरी की और करोल बाग सहित दिल्ली के प्रमुख हिस्सों में बीकानेरवाला के रूप में कई दुकानें खोलीं. बीकानेरवाला फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के वर्तमान प्रबंध निदेशक, श्याम सुंदर अग्रवाल, 1968 में पारिवारिक व्यवसाय में शामिल हुए. 

उस समय, श्याम सुंदर अग्रवाल केवल 16 साल के थे और उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी. अपने पिता से मिठाई बनाने की कला सीखते हुए, 1980 के दशक में, जब पश्चिमी फास्ट-फूड पिज्जा ने भारतीय बाजार में प्रवेश किया, अग्रवाल ने महसूस किया कि और भी भारतीय उत्पादों को जोड़ना चाहिए. इस प्रकार बीकानेरवाला ने देश के विभिन्न हिस्सों में कई आउटलेट खोले.

बीकानेरवाला ने चखा सफलता का स्वाद
बीकानेरवाला ने अपने मिठाई और रेस्तरां व्यवसाय में सफलता का स्वाद चखा. दुनिया के ज्यादा ग्लोबलाइज्ड होने से और भारतीयों के दुनियाभर में बसने के कारण बीकानेरवाला ने दुनिया भर के भारतीयों के लिए पारंपरिक भारतीय डिशेज लाने का फैसला किया. इससे बिकानो ब्रांड का निर्माण हुआ. 

सबसे बड़ा सफलता उन्हें तब मिली जब उन्होंने भारतीय नमकीन बेचने के लिए पेप्सिको के नए ब्रांड “लेहर” के साथ एक समझौता किया. इसके लिए उन्होंने हरियाणा के फरीदाबाद में एक नया प्लांट खोला. अपने अविश्वसनीय व्यापारिक कौशल के कारण बीकानेरवाला काफी ऊंचाईयों पर पहुंचा.

दूसरे देशों में भी है उपस्थिति
लोगों द्वारा दिए गए नाम के साथ, बीकानेरवाला का स्वाद और प्रसिद्धि समय के साथ फैलती गई. आज, बीकानेरवाला भारत में 60 से अधिक आउटलेट्स के साथ विभिन्न प्रकार के खाद्य उत्पादों के साथ हर दिन लाखों ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है और संयुक्त राज्य अमेरिका, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भारत के बाहर इसकी उपस्थिति है.

नमकीन और स्नैक्स की दुकानों के रूप में एक छोटी सी गली में शुरू हुई बीकानेरवाला कंपनी आज 1,300 करोड़ रुपये (यूएस $ 178 मिलियन) के मूल्य के साथ प्रमुख स्नैक्स ब्रांड्स में से एक है. किसने सोचा था कि बीकानेर की एक छोटी सी दुकान एक दिन पूरी दुनिया में मशहूर हो जाएगी, लेकिन मेहनत और लगन से क्या संभव नहीं है.

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