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May 30, 2023, 10:46 pm
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करोड़ो आवासहिनों को छत दिलाने का सपना पुरा करने चुनावी मैदान पर उतरेगी मोदी सरकार, 2.94 करोड़ लोगों को घर दिलाने की तैयारी

आगामी लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरने से पहले मोदी सरकार उस उपलब्धि का प्रमाण-पत्र अपने हाथ में रखना चाहती है, जो करोड़ों आवासहीनों का अपनी छत का सपना पूरा करने जा रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए समय-सीमा, तो दिसंबर, 2024 तय की गई थी, लेकिन अब राज्यों से इस गति से काम करने के लिए कहा गया है कि लक्ष्य को दिसंबर, 2023 तक ही प्राप्त कर लिया जाए।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगभग तीन करोड़ लाभार्थियों के लक्ष्य में 60 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के हैं।

‘2024 से पहले पूरी हों आवास योजना’

भाजपा सरकार ने केंद्र की सत्ता में आसीन होने के बाद वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शुरू की थी। पहले इसे 2022 तक ही पूरा किया जाना निर्धारित था, लेकिन कोरोना महामारी के असर के चलते अगस्त, 2022 में केंद्रीय कैबिनेट ने इसकी समय-सीमा को 31 दिसंबर, 2024 तक के लिए बढ़ा दिया। हालांकि, सरकार का जोर इस बात पर है कि ”सभी को आवास” के लक्ष्य वाले इस महत्वाकांक्षी मिशन को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही पूरा कर लिया जाए।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के पोर्टल पर दर्ज आंकड़े के मुताबिक, कुल आवासों का लक्ष्य 2,94,03,462 है जिनमें से 2,18,67,542 आवास बन चुके हैं। पिछले दिनों ही मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर कहा गया कि आवास स्वीकृति के लिए समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है, जो कि अंतिम बार है। अब लक्ष्य के सापेक्ष स्वीकृति लंबित न रहे। इसी तरह भूमिहीनों के आवास के लिए भूमि की औपचारिकता 31 मार्च तक पूरी कर ली जाए।

दिसंबर, 2023 तक लक्ष्य प्राप्ति के लिए पाक्षिक रणनीति पर जोर देते हुए केंद्र द्वारा सभी राज्यों के साथ एक दौर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी की जा चुकी है। यदि इतनी संख्या में गरीबों को आवास मिल जाते हैं, तो इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में भाजपा सरकार लोकसभा चुनाव में प्रचारित करना चाहेगी।

पहले से ही दलित और पिछड़ों पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी भाजपा की नजर उस आंकड़े पर भी है कि इस योजना के कुल लाभार्थियों में 60 प्रतिशत अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग से, 25 प्रतिशत अन्य हैं, तो 15 प्रतिशत लाभार्थी अल्पसंख्यक वर्ग के हैं।

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