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चंडी को ग्रामीणों ने बताया डायन उसी ने गांव को डाकुओं से बचाया

चंडी को ग्रामीणों ने बताया डायन उसी ने गांव को डाकुओं से बचाया

एनआईबी रिपोर्टर: सामाजिक कुरीतियों से जूझती चंडी, जिसे पूरा गांव भक्षक (डायन) की संज्ञा देता है। एक रात वही पूरे गांव को डाकुओं से बचाती है। सामाजिक ताना बानों से जूझती चंडी के संघर्ष और खुद को साबित करने की कहानी को नाटक वायन के जरिए शुक्रवार को प्रस्तुत किया गया। रविवि में यूथ फेस्ट के अंतिम दिन अलग-अलग कॉलेज की टीम ने नाटक का मंचन किया। इसी क्रम में दिशा कॉलेज की टीम ने वायन नाटक का मंचन किया।

ये है कहानी

डायन की कहानी शुरू होती है गांव के काली मंदिर प्रांगण से यहां नायिका चंडी दासी को पूरे गांव वाले नैतिकता के आधार पर अंतिम संस्कार का कार्य करने को कहते हैं। चंडी अब अंतिम संस्कार का कार्य करने लगती है। गांव में ही रहने वाले सरकारी मुलाजिम मलिंदर को चंडी दासी से प्रेम हो जाता है, दोनों विवाह कर लेते हैं और इनका एक बच्चा होता है, जिसका नाम भागीरथ है। एक दिन मलिंदर की बहन के बच्चे की मौत हो जाती है और वो इसके लिए चंडी को जिम्मेदार ठहराती है। एक रात जंगली जानवर जमीन खोदकर शव निकाल रहे होते हैं। चंडी वहां पहुंचकर जानवरों को भगाती है। और फिर से शव को दफनाने लगती है। इसी बीच मलिंदर और ग्रामीण वहां पहुंचते हैं और चंडी के हाथ में बच्चे का शव देखकर उसे बच्चों का शव खाने वाली डायन समझने लगते हैं। मलिंदर उसे छोड़ देता है ये बात पूरे गांव में फैल जाती है। घटना के बाद से वह मुक्तिधाम में ही रहने लगती है। आखिरकार एक दिन गांव में डाकू हमला कर देते हैं और गांव वालों को बचाने के लिए चंडी ट्रेन के सामने आकर अपनी जान दे देती है। इस तरह खुद को बेकसूर साबित करते हुए चंडी का दुखद अंत हो जाता है।

कुछ संवाद, जिन्होंने छोड़ी छाप

चंडी कहती है- अगर मैं डायन हूं तो ये तूफान रूक जाए, ये बांस का पहाड़ उड़ जाए ये आंधी यही थम जाए और तेजी से आती हुई ट्रेन रुक जाए, लेकिन ट्रेन नहीं रूकती और चंडी की मौत हो जाती है। भागीरथ कहता है- मेरी मां चंडी दास डायन नहीं थी, वो तो बहादुर मां थी। मलिंदर कहता है मैं नहीं चाहता कि बिना कागजों को पढ़े मेरा बेटा अंगूठा लगाए । चंडी कहती है- जब मैं छोटी थी, मेरी उम्र की लड़कियां घूमा करती थी और मैं लाशें दफनाया करती थी, अब मुझसे ये काम नहीं होता, बच्चों के नन्हे हाथ मेरे सपनों में आते हैं।

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