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छ.ग. की जीवनदायिनी महानदी का जलस्तर गिरा: एनीकट, गाद व मुरुम-मिट्टी ने रोकी पानी की धारा

राजिम, 17 फरवरी (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता): छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी सबसे बड़ी और लंबी महानदी जिससे पूरे प्रदेश के लोगों की प्यास बुझाई जा सकती है, आज अपनी बदहाली का किस्सा स्वयं बता रही हैं। गाद (सिल्ट) और मिट्टी-मुरूम से नदी इतनी बुरी तरीके से पट गई है कि लोग वहां क्रिकेट आदि खेल सकते हैं। 

एनीकट, गाद व मुरुम-मिट्टी ने रोकी पानी की धारा

वर्तमान में नदी का पूरा पानी सड़ चुका है। ऊपरी हिस्से में पूरी तरह से गाद (सिल्ट) ही दिखाई देता है नदी की धार नहीं। निचले हिस्से पारागांव की ओर पूरे हिस्से में जलकुंभी उग आई है जिससे ऐसा प्रतीत होता है नदी में हरी चादर बिछा दी गई हो। नदी में गाद जमा होने के कारण नदी से लगे इलाकों में भी भूजल स्तर नीचे चला गया है और वहां पीने के पानी की समस्या होने लगी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गाद निकलने से वाटर रिचार्जिंग में तेजी आएगी और इससे पेयजल की समस्या भी दूर होगी। उनका मानना है कि नदी में मुरुम पाटकर रोड बनना भी घातक है क्योंकि मुरुम पानी के बहाव को रोक देती है जबकि रेत पानी के बहाव को बनाए रखती है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों से गुजरने वाली महानदी का स्रोत एक बार फिर इन दिनों सूख गया है। नदी के पुनरुद्धार हेतु पिछले कई दशकों से कोई काम नहीं हुआ है।

एनीकट के कारण हो रहा प्रवाह अवरुद्ध

नदी में गर्मी के दिनों में भी पानी रहे इसके लिए सरकार ने कई स्थानों पर स्टॉप डैम का भी निर्माण कराया है, वहां पानी भी है, लेकिन नदी में गाद (सिल्ट) जमा होने के कारण आसपास के क्षेत्रों में वाटर रिचार्जिंग नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञ व विभागीय सूत्र बताते हैं कि नदी में गाद (सिल्ट) जमने का मुख्य कारण दोनों ओर एनीकट का बनना है क्योंकि एनीकट गाद को बहाकर नहीं ले जा सकते। 

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